लेखक/प्रकाशक जानकारी: मुख्य शीर्षक के नीचे, पाठ में "कृष्ण कृपाभूति श्री श्रीमद् ए.सी. भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद संस्थापक: अंतर्राष्ट्रीय कृष्ण भावनामृत संघ" का भी उल्लेख है, जो लेखक और इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शसनेस (इस्कॉन) को प्रकाशक के रूप में दर्शाता है। इस पुस्तक को अंग्रेजी में "कृष्ण, पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान" या "कृष्ण पुस्तक" के नाम से भी जाना जाता है
पुस्तक का उद्देश्य: यह पुस्तक भगवान कृष्ण की संपूर्ण लीलाओं का वर्णन करती है, जैसा कि श्रीमद्भागवतम के दसवें स्कंध में प्रस्तुत किया गया है. यह मूल रूप से तीन खंडों में प्रकाशित हुई थी, लेकिन बाद में इसे एक बड़ी, सचित्र पुस्तक के रूप में संकलित किया गया.
लोकप्रियता: यह वैदिक ग्रंथ विश्व स्तर पर लोकप्रिय है और इसका कई भाषाओं में अनुवाद किया गया है, जैसे अंग्रेजी, जर्मन, फ्रेंच, इतालवी और रूसी.